नए साल में बस्तर बना पर्यटकों की पहली पसंद, देश-विदेश से सैलानियों का लगा तांता
नए साल का जश्न मनाने और घूमने का प्लान है, तो सीधे आइए बस्तर। कभी लाल आतंक के नाम से पहचाना जाने वाला बस्तर अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और रोमांचक पर्यटन गतिविधियों के लिए जाना जा रहा है। नए साल के मौके पर बस्तर के पर्यटन स्थलों में बाहर से आए पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
प्रदेश का मिनी नियाग्रा कहलाने वाला चित्रकोट जलप्रपात, मनमोहक तीरथगढ़ जलप्रपात और विश्व मानचित्र पर पहचान बना चुका धूमड़ारास इन दिनों पर्यटकों से गुलजार हैं। कायकिंग और बंबू राफ्टिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लेने देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में सैलानी बस्तर पहुंच रहे हैं।
पर्यटकों का कहना है कि वे अब बस्तर के अंदरूनी इलाकों में भी बेखौफ होकर घूम पा रहे हैं। पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि नए साल पर मनाली, कश्मीर और गोवा जैसे पारंपरिक स्थलों की बजाय लोग बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति को देखने आ रहे हैं। बाहर से आए सैलानी बदलते बस्तर को करीब से देखकर इसकी खुलकर सराहना कर रहे हैं।
प्रशासनिक अमला भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का स्वागत कर रहा है। सैलानियों का मानना है कि बस्तर अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है—जहां डर नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का संगम है।
नए साल में बस्तर के पर्यटन स्थलों पर गूंजती रौनक यही संदेश दे रही है कि बस्तर अब देश-दुनिया में पर्यटन के नाम से पहचाना जाएगा।



