Sakti news प्लांट से निकलने वाली राखड़ लोगों के लिए बनी श्राप,सोन नदी में मिलेगा फ्लाई एश:स्थानीय लोगों को हाेने लगेगी परेशानी;
सक्ती जिले में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। समतलीकरण और गड्ढों के भराव के लिए जिस मिट्टी का उपयोग होना चाहिए था, उसकी जगह बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राखड़ का अंधाधुंध उपयोग किया जा रहा है। यही राखड़ अब किसानों के खेतों और फसलों पर आफत बनकर टूट पड़ी है। भारी बारिश के चलते बेतरतीब तरीके से डंप की गई राखड़ बहकर ग्राम गुंजियबोर के सोन नदी के साथ साथ धान की फसल को पूरी तरह बर्बाद होगा।
राखड़ खेतों और खाली पड़ी ज़मीन में डंप की जा रही है। गर्मी के दिनों में यही राखड़ उड़कर आसपास के रिहायशी इलाकों में प्रदूषण फैलेगा, वहीं आगामी बरसात में यह राखड़ खेतों में बहेगा,
मामला सक्ती जिले के ग्राम पंचायत गुंजियबोर का जहां जनप्रतिनिधियों एवं तहसीलदार, पटवारी से मिलीभगत कर सोन नदी से महज 80 मीटर दूर ही जहरीला राखड़ गिराया जा रहा है,पर्यावरण विभाग द्वारा नियमों को जेब मे रख कर नदी नालों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।जगह-जगह सड़कों पर राखड़ का ढेर बिखरा हुआ है। तेज़ हवा चलने पर यही राखड़ उड़कर सड़क पर धुंध जैसा माहौल पैदा कर देता है। इससे न केवल राहगीर परेशान हैं बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं की स्थिति भी निर्मित हो रही है। वाहन चालक धुंध और राखड़ की परतों से होकर किसी तरह गुजरते हैं, वहीं पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि ट्रकों की ओवरलोडिंग के कारण लगातार राखड़ सड़क पर गिर रहा है। लेकिन परिवहन और जिम्मेदार विभाग इस समस्या पर आंख मूंदे बैठे हैं। ट्रक चालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और संबंधित विभाग को ठेंगा दिखा रहे हैं। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है।यदि जल्द ही ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगाई गई और राखड़ परिवहन व्यवस्था को नियंत्रित नहीं किया गया तो बड़े हादसे होना तय है। लोगों ने मांग की है कि शासन-प्रशासन इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देकर जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई करे, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
इस मामले में हमने तहसीलदार रवि राठौर से संपर्क करने की कोशिश की मगर उनका नंबर व्यस्त आने से वर्जन रुका हुआ है



