*किकिरदा पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों के फर्जी भुगतान का आरोप,शिकायत के 15 दिनों बाद भी नहीं हो सकी जांंच शुरू*
*शटर, बोर खनन, डस्टबीन, पाइप और निर्माण सामग्री के बिलों पर उठे सवाल*
सक्ती/हसौद। ग्राम पंचायत किकिरदा में शासकीय राशि के दुरुपयोग और विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिल लगाकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत के पंचों ने कलेक्टर,जिला पंचायत सीईओ,जनपद पंचायत सीईओ को लिखित शिकायत सौंपकर पंचायत में कराए गए विभिन्न कार्यों, उनके बिलों और वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती गोमती बाई मांझी,सचिव सहित संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता पंचों का आरोप है कि पंचायत में कई ऐसे कार्यों के बिल लगाए गए हैं, जिनमें बिल में दर्शाई गई सामग्री अथवा कार्य मौके पर हुआ ही नहीं ।शिकायत में अलग-अलग कार्यों के संबंध में बिलों और भुगतान की जानकारी देते हुए शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार पटेल भवन के पास अटल व्यावसायिक परिसर में शटर लगाने के नाम पर ₹37,200 का बिल प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मौके पर तीन पुराने शटरों में डेंटिंग-पेंटिंग कर उसे नया शटर लगाने का कार्य दर्शाया गया। मामले में मौके का भौतिक सत्यापन कर बिल और वास्तविक कार्य की तुलना कराने की मांग की गई है।
ग्राम कटही में आंगनबाड़ी भवन के सामने बोर खनन के लिए 365 फीट तथा विशेश्वरी मंदिर के पास 384 फीट खुदाई का बिल लगाए जाने का उल्लेख है शिकायतकर्ताओं के अनुसार दोनों स्थानों पर लगभग 120-120 फीट तक ही खुदाई किए जाने का आरोप है। ऐसे में वास्तविक खुदाई की गहराई, उपयोग की गई सामग्री और भुगतान की गई राशि का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में डस्टबीन के नाम पर ₹14,000 और ₹6,000 के दो बिल प्रस्तुत किए गए। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर इतनी राशि के डस्टबीन उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने संबंधित बिलों की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
बोर खनन कार्य के लिए प्लास्टिक पाइप का उपयोग किए जाने के बावजूद जेआई पाइप का बिल लगाए जाने का आरोप शिकायत में लगाया गया है। इस मामले में ₹85,400 की राशि का आहरण किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं ने वास्तविक रूप से उपयोग किए गए पाइप और बिल में दर्शाई गई सामग्री का मिलान कराने की मांग की है।
वहीं मंदिर के पास बोरिंग के सामान में केसिंग एवं प्लास्टिक पाइप लगाए जाने के बावजूद जेआई पाइप का बिल लगाए जाने का आरोप लगाते हुए ₹1,05,000 के भुगतान की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार आयुष ट्रेडर्स से सीमेंट, गिट्टी और दरवाजा आदि के नाम पर ₹1,12,000 का बिल तैयार कर राशि का आहरण किया गया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संबंधित कार्य मौके पर हुआ ही नहीं अथवा बिल के अनुरूप सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। इसकी भी स्थल जांच कराने की मांग की गई है।
*तालाब से मिट्टी निकालकर बेचने का आरोप*
शिकायत में ग्राम के तालाब की जेसीबी से खुदाई कर निकली मिट्टी को बेचने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि इस कार्य में सरपंच एवं उपसरपंच की भूमिका की जांच की जाए तथा मिट्टी की बिक्री से प्राप्त राशि का भी हिसाब लिया जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल बिलों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि मौके का भौतिक सत्यापन, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, माप पुस्तिका और संबंधित निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि शिकायत के 15 दिन बीत जाने के बावजूद न तो जांच की स्थिति सार्वजनिक की गई है और न ही जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई हुई है।
प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच टीम गठित की जाए और शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में शासकीय राशि के दुरुपयोग अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
*पहले भी लग चुका है आरोप*
वहीं इससे पहले भी सरपंच के स्थान पर उनके प्रतिनिधियों द्वारा पंचायत के कार्यो में हस्तक्षेप करने आरोप लग चुका है साथ ही पुराना पंचायत भवन को भी बिक्री करने का आरोप लगा था लेकिन किसी भी मामले कि जांच अभी तक नहीं कि गई जिससे स्पष्ट है कि प्रशासन सरपंच को संरक्षण दे रही है ।



