अकाल की घड़ी नजदीक? उधर होर्मुज, इधर समुद्र से आई वॉर्निंग, पूरे देश पर एक और संकट की आहट
एक तरफ होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संकट की घड़ी में पूरे देश को एकजुट होकर साथ चलने की अपील की है वहीं पूरे देश पर मंडरा रहे एक और संकट ने चिंता बढ़ा दी है. इस बार चेतावनी समुद्र की तरफ से आई है जो बता रही है कि अल-नीनो के चलते आने वाले पांच महीने देश के लिए बेहद कठिन हो सकते हैं और अकाल पड़ सकता है.
प्रशांत महासागर में हो रही हलचल मौसम और जलवायु की उस बेचैनी को बता रही है जो आने वाले महीनों में भारत में कहर बनकर टूट सकती है. अप्रैल में विश्व के महासागरों का औसत सतही तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो साल 2024 के रिकॉर्ड के ठीक नीचे है लेकिन इतिहास के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. समुद्र की यह गर्मी अकाल, भुखमरी, सूखा और रोगों को बढ़ाने वाली हो सकती है.
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से, अमेरिका-मैक्सिको के पश्चिमी तट तक का पानी पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गया है. यह गर्माहट अल-नीनो(El-Nino) की मजबूत दस्तक का सबूत पेश कर रही है. वैसे तो यह जलवायु पैटर्न हर दो से सात साल में आता है और नौ से बारह महीने तक रहता है, लेकिन इस बार हालात काफी खराब बताए जा रहे हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से, अमेरिका-मैक्सिको के पश्चिमी तट तक का पानी पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गया है. यह गर्माहट अल-नीनो(El-Nino) की मजबूत दस्तक का सबूत पेश कर रही है. वैसे तो यह जलवायु पैटर्न हर दो से सात साल में आता है और नौ से बारह महीने तक रहता है, लेकिन इस बार हालात काफी खराब बताए जा रहे हैं.
भारत में अकाल, सूखा और भुखमरी जल्द?
अल-नीनो का प्रभाव देखें तो भारत पर इसका काफी खराब असर हो सकता है. यहां बारिश और मॉनसून के महीनों में तेज गर्मी, लू की लहरें और सबसे खतरनाक, कमजोर मानसून रह सकता है और इसकी वजह से देश के कृषि क्षेत्र, जहां लाखों किसान मानसून पर निर्भर हैं, इस बार फिर चुनौती का सामना कर सकते हैं. अभी तक उत्तर-पश्चिम भारत में कम गर्मी, हल्की बारिश, आंधी तूफान की स्थिति है लेकिन जैसे-जैसे अल-नीनो अपने चरम पर आएगा यहां हालात बदल जाएंगे. भीषण गर्मी, कम बारिश और सूखे की वजह से अकाल और भुखमरी के हालात पैदा हो सकते हैं.
अल-नीनो का प्रभाव देखें तो भारत पर इसका काफी खराब असर हो सकता है. यहां बारिश और मॉनसून के महीनों में तेज गर्मी, लू की लहरें और सबसे खतरनाक, कमजोर मानसून रह सकता है और इसकी वजह से देश के कृषि क्षेत्र, जहां लाखों किसान मानसून पर निर्भर हैं, इस बार फिर चुनौती का सामना कर सकते हैं. अभी तक उत्तर-पश्चिम भारत में कम गर्मी, हल्की बारिश, आंधी तूफान की स्थिति है लेकिन जैसे-जैसे अल-नीनो अपने चरम पर आएगा यहां हालात बदल जाएंगे. भीषण गर्मी, कम बारिश और सूखे की वजह से अकाल और भुखमरी के हालात पैदा हो सकते हैं.
कितना बढ़ जाएगा तापमान?
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अल-नीनो मजबूत होता है तो उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के आसार हैं. दिन में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच सकता है. शहरों में हीट वेव्स की संख्या बढ़ सकती है. इससे स्वास्थ्य समस्याएं, खासकर बुजुर्गों और बच्चों में बढ़ेंगी. दिन-रात गर्मी पड़ने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी.
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अल-नीनो मजबूत होता है तो उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के आसार हैं. दिन में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच सकता है. शहरों में हीट वेव्स की संख्या बढ़ सकती है. इससे स्वास्थ्य समस्याएं, खासकर बुजुर्गों और बच्चों में बढ़ेंगी. दिन-रात गर्मी पड़ने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी.
कितनी कम होगी बारिश? फसलों पर असर
अल-नीनो का मानसून पर सबसे गहरा असर पड़ेगा. एल नीनो आमतौर पर भारत में वर्षा को कम करता है. अगर यह मजबूत रहा तो जून-सितंबर का कुल वर्षा औसत से 10-20% कम हो सकती है. इससे खरीफ फसलों – धान, मक्का, सोयाबीन, कपास – की पैदावार प्रभावित होगी. पानी की कमी से सिंचाई संकट गहरा सकता है. छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
अल-नीनो का मानसून पर सबसे गहरा असर पड़ेगा. एल नीनो आमतौर पर भारत में वर्षा को कम करता है. अगर यह मजबूत रहा तो जून-सितंबर का कुल वर्षा औसत से 10-20% कम हो सकती है. इससे खरीफ फसलों – धान, मक्का, सोयाबीन, कपास – की पैदावार प्रभावित होगी. पानी की कमी से सिंचाई संकट गहरा सकता है. छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
क्या तूफान भी आ सकते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है तो इससे चक्रवाती तूफानों की संभावना भी बढ़ सकती है, हालांकि उनकी संख्या और तीव्रता पर एल नीनो का विरोधी प्रभाव पड़ता है.
दिलचस्प बात यह है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है तो इससे चक्रवाती तूफानों की संभावना भी बढ़ सकती है, हालांकि उनकी संख्या और तीव्रता पर एल नीनो का विरोधी प्रभाव पड़ता है.
ऐसे में भारत में अब सावधानी और सतर्कता बरने का समय है. इस समय सरकार और लोगों को मिलकर जल संरक्षण, फसल बीमा, वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों और मौसम पूर्वानुमान को और मजबूत करने पर जोर देना चाहिए. किसानों को सूखा-प्रतिरोधी बीजों और फसल विविधीकरण की सलाह दी जानी चाहिए. आम लोगों को पानी बचाने और ऊर्जा संरक्षण की आदत डालनी होगी.



