
हसौद में खुलेआम फल-फूल रहा कबाड़ का अवैध साम्राज्य
पुलिस-प्रशासन की ‘नसीहत’ बेअसर… चोरी का सामान तक खरीद-बिक्री
सक्ती जिले के हसौद में कबाड़ के अवैध कारोबार ने एक संगठित रूप ले लिया है। पिछले कई वर्षों से बिना किसी डर, रोक-टोक और प्रशासनिक नियंत्रण से यह धंधा खुलेआम चल रहा है। हालात ऐसे हैं कि स्थानीय पुलिस की समझाइश तक इन कबाड़ी व्यापारियों पर असर नहीं डाल पा रही। कागजों पर “स्टॉक रजिस्टर” दिखाकर यह पूरा खेल वैधता का भ्रम खड़ा किए हुए है, जबकि जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे कैमरे में सरकारी संस्था की ओर से बेचे गए सरकारी टेबल को कबाड़ियों द्वारा मौके पर ही तोड़ते हुए कैद किया गया है। इसे बड़ी गाड़ी में लादकर बाहर भेजा जा रहा था। इससे साफ होता है कि सरकारी संसाधन भी इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को इस गैर-कानूनी गतिविधि की भनक नहीं या फिर खामोशी किसी और वजह से है?
गांव में लगातार बढ़ रही चोरी—कबाड़ कारोबार से सीधा संबंध
हसौद और आसपास के गांवों में बीते कुछ समय से चोरी की वारदातों में तेजी आई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन अवैध कबाड़ी दुकानों का चोरी की घटनाओं से सीधा संबंध है। दुकानों में खरीद-बिक्री होने वाले सामानों में साइकिल, बाइक के पार्ट्स, घरों की धातु सामग्री और घरेलू उपकरणों तक शामिल हैं। आशंका यह भी है कि रात में चोरी होने वाला बड़ा हिस्सा सीधे इन्हीं दुकानों में पहुंच जाता है, जहां बिना किसी वैध दस्तावेज के तुरंत सौदा कर लिया जाता है।
इन कबाड़ी दुकानों के पास न तो कोई लाइसेंस है और न ही कोई जीएसटी पंजीयन। यदि कहीं कागज दिखाए भी जाते हैं तो वह सिर्फ औपचारिकता के लिए। वास्तविक कारोबार “जुगाड़ तंत्र” पर चल रहा है, जिसमें टैक्स चोरी, चोरी का माल, और अवैध खरीद-बिक्री तीनों शामिल हैं। यही नहीं, इस धंधे में शामिल कई युवा और नशे से ग्रस्त किशोर चोरी कर सामान लाने का काम करते हैं, जिससे गांवों में अपराध का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय स्तर से लेकर बड़े शहर तक फैला नेटवर्क
हसौद का यह अवैध कबाड़ कारोबार अब छोटे गांवों की सीमा से निकलकर बड़े शहरों तक फैला हुआ है। बताया जाता है कि बिलासपुर समेत अन्य बड़े शहरों में माल भेजने के लिए एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार है। बड़े व्यापारी अपने एजेंटों के माध्यम से हसौद जैसे छोटे इलाकों से चोरी का माल जमा कर मोटी कमाई कर रहे हैं।
आश्चर्य की बात है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर पुलिस और प्रशासन की नजर नहीं जाती। या फिर जानकर भी कार्रवाई न होने के पीछे कोई मिलीभगत है? यह बड़ा सवाल है।
प्रशासन कब जागेगा?
हसौद में खुलेआम चल रहे अवैध कबाड़ कारोबार से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अपराध रोकने का दावा करने वाला तंत्र यदि इसी तरह आंखें मूंदे रहेगा, तो गांवों में चोरी, लूट और नशे का चक्र और तेज होगा। सरकारी संपत्तियों का अवैध निपटान होना यह दर्शाता है कि पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं गहरी दरार है।
स्थानीय लोग अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं—क्योंकि अगर अब भी इस अवैध नेटवर्क पर लगाम नहीं लगी, तो हसौद एक संगठित अपराध केंद्र के रूप में बदनाम होने में देर नहीं लगेगी।



