भरत सिंह चौहान संवाददाता जांजगीर-चांपा। जिले के ग्राम कुटरा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज परियोजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। करीब 3 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से चल रहे निर्माण कार्य में अनियमितताओं और सामग्री की कथित हेराफेरी का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। आरोप किसी राजनीतिक दल या स्थानीय संगठन ने नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने लगाए हैं।
गार्ड बसंत गाड़ेवाल का दावा है कि मेडिकल कॉलेज निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे सरिया के टुकड़े, रेत, गिट्टी और मुरुम को रात के समय आसपास के ग्रामीणों को बेचा जा रहा है। उनका आरोप है कि निर्माण स्थल से लगातार सामग्री बाहर भेजी जा रही है, जिससे शासकीय निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बसंत गाड़ेवाल ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य से जुड़े कुछ अधिकारी रात के समय शराब सेवन करते हैं और शराब की खाली बोतलों को आसपास के खेतों में फिंकवा दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब गार्ड ने दावा किया कि इन तथ्यों को सामने लाने के बाद निर्माण स्थल पर कार्यरत 18 गार्डों को नौकरी से हटा दिया गया। गार्ड का कहना है कि यह कार्रवाई उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को दबाने के उद्देश्य से की गई है।
इस पूरे मामले को लेकर जब मीडिया ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पक्ष जानने की कोशिश की, तो अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की चुप्पी के कारण मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह सार्वजनिक धन से बन रहे महत्वपूर्ण संस्थान के निर्माण में बड़ी अनियमितता का मामला हो सकता है। दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य में कथित गड़बड़ियों को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है। अब सबकी नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को जनता के सामने लाया जाता है या नहीं।
नोट: चूंकि ये आरोप एक गार्ड द्वारा लगाए गए हैं, इसलिए पत्रकारिता के मानकों के अनुसार इन्हें “आरोप” के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जब तक कि किसी जांच में उनकी पुष्टि न हो जाए।



