जांजगीर चांपा में भोले भले किसानों को नौकरी देने का झांसा:- किसानों से शारदा एनर्जी पावर प्लांट ने जमीन की अधिग्रहण, दूसरे को बेची जा रही जमीन,किसानों ने किया विरोध
जांजगीर चांपा जिले के ग्राम पंचायत बक्सरा के लगभग 40 किसानों ने आरोप लगाया कि उनके साथ धोखा हुआ है। शारड एनर्जी पावर प्लांट लगाने के नाम पर जमीनों को उनसे अधिग्रहण किया गया था। और उचित मुआवजा के साथ नौकरी भी देने की बात कही गई थी। वही उस जमीन को दूसरे लोगों को बेचा जा रहा है। जिसका किसानों ने विरोध किया है और जांच की मांग की गई है।
जानकारी के अनुसार,,वर्ष 2008-9 से 2010 में शारड एनर्जी पावर लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ शासन के साथ गांव में पावर प्लांट लगाने के लिए MOU किया था। जिसमें छत्तीसगढ़ शासन ने गांव की खेती जमीन को किसानों से भू अर्जन की कार्यवाही शुरू की साथ ही पावर कंपनी ने शासन की अनुमति से सीधे किसानों की जमीन की खरीदी शुरू की थी।
10 लाख रुपये प्रति एकड़ देने का दावा, 1.50 लाख में कराई रजिस्ट्री का आरोप..
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी की ओर से किसानों के बीच यह बात प्रचारित की गई थी कि जमीन के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रतिकर दिया जाएगा। साथ ही प्रत्येक खातेदार के परिवार के एक सदस्य को रोजगार, पुनर्वास नीति के अनुसार पुनर्वास और गांव के विकास का भरोसा दिलाया गया था।
आरोप है कि कंपनी ने करीब 40 किसानों से सीधे विक्रय पत्र के माध्यम से जमीन खरीदी और रजिस्ट्री 1.50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से कराई गई। किसानों को कथित तौर पर बताया गया कि भू-अर्जन मामले में जमीन का मूल्य 10 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित हो रहा है और अवार्ड होने के बाद उन्हें उसी दर से भुगतान किया जाएगा।
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2011 में भू-अर्जन अवार्ड हुआ और अन्य अर्जित भूमि के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रतिकर दिया गया। किसानों का दावा है कि भू-अर्जन के बाद भी वे भूमि पर खेती करते रहे और वर्ष 2019-20 में उन्हें मुआवजा दिया गया।
पावर प्लांट नहीं लगा, जमीन पर खेती करते रहे किसान
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी द्वारा वर्ष 2009-10 के दौरान खरीदी और अर्जित की गई जमीन पर अब तक पावर प्लांट स्थापित नहीं किया गया। उनका कहना है कि संबंधित भूमि का कब्जा भी कंपनी ने नहीं लिया और किसान ही लंबे समय से उस पर खेती करते आ रहे हैं।
अब आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025-26 से कंपनी द्वारा किसानों से सीधे खरीदी गई जमीन को निजी लोगों के पक्ष में बिक्री पत्र के माध्यम से बेचा जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन जमीनों पर खरीददारों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज भी हो गए हैं।
बेदखली की धमकी देने का आरोप
काश्तकारों ने आरोप लगाया है कि जमीन खरीदने वाले लोग उन्हें खेतों से बेदखल करने की धमकी दे रहे हैं। शिकायत में बाहरी लोगों और कथित प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है।
किसानों का कहना है कि भूमि उनके लिए आजीविका का प्रमुख साधन है। यदि उन्हें जमीन से बेदखल किया गया तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
पुनर्वास और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायत में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। किसानों ने छत्तीसगढ़ राज्य आदर्श पुनर्वास नीति-2007 के तहत प्रभावित काश्तकारों को मिलने वाले अधिकारों और लाभों की भी मांग उठाई है।
काश्तकारों का कहना है कि पावर प्लांट स्थापना के उद्देश्य से खरीदी और अर्जित की गई भूमि को अन्य निजी व्यक्तियों को बेचे जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कंपनी द्वारा किए गए कथित विक्रय की जांच कर उसे निरस्त करने तथा पात्रता और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार भूमि को किसानों के नाम वापस दर्ज करने की मांग की है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित कंपनी और जमीन खरीदने वाले पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है। भूमि की वास्तविक स्थिति, विक्रय की वैधता और राजस्व अभिलेखों में दर्ज नामों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी



