आंकड़ों की वाहवाही बनाम ज़मीनी हकीकत:- जांजगीर–चांपा पुलिस की प्रेस वार्ता पर उठे सवाल कई बड़े मामले में पुलिस है असफल…
जांजगीर–चांपा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने आज प्रेस वार्ता कर बीते एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं, चोरी, एनडीपीएस समेत अन्य मामलों में की गई पुलिस कार्रवाई का लेखा–जोखा पेश किया। प्रेस वार्ता में आंकड़ों के जरिए पुलिस की उपलब्धियां गिनाई गईं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग नजर आती दिख रही है।
हकीकत यह है कि जिले में लगातार बड़ी लूट, चोरी और डकैती की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई गंभीर मामलों में अब तक न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही ठोस खुलासा हो पाया है। इससे आम नागरिकों में भय और असंतोष का माहौल बनता जा रहा है।
पुलिस अक्सर छोटी–मोटी कार्रवाइयों को लेकर प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर देती है, लेकिन जब बात लाखों की लूट, संगठित चोरी गिरोह या बड़ी डकैती की आती है, तो कार्रवाई सवालों के घेरे में दिखती है। कई पीड़ितों को आज भी न्याय का इंतजार है।
प्रेस वार्ता में पेश किए गए आंकड़े कागजों में भले ही बेहतर तस्वीर दिखाते हों, लेकिन ज़मीन पर अपराध नियंत्रण को लेकर जांजगीर-चांपा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या पुलिस सिर्फ आंकड़ों और प्रेस नोट तक ही सीमित रह गई है, या फिर जिले की जनता को बड़ी वारदातों से राहत दिलाने के लिए ठोस, प्रभावी और भरोसेमंद कार्रवाई भी देखने को मिलेगी?



