मानवता और आध्यात्मिकता का महासंगम: संत रामपाल जी महाराज ‘किसान संत गरीब दास गरिमा सम्मान’ से विभूषित
सक्ती/जैजैपुर
मुख्य आकर्षण:
हरियाणा के गिरावड़ से सीधा प्रसारण, जैजैपुर दशहरा मैदान में उमड़ा जनसैलाब।
बाढ़ और आपदा प्रबंधन में ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के लिए मिला सम्मान।
दहेज मुक्त समाज और नशा मुक्ति के संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न।
जैजैपुर (सक्ती):
नगर पंचायत जैजैपुर के दशहरा मैदान में आज एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आयोजित ‘किसान संत गरीब दास गरिमा सम्मान समारोह’ में शिरकत की। यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना, बल्कि समाज सेवा के प्रति एक नई अलख जगाने का माध्यम भी साबित हुआ।
हरियाणा के जिला झज्जर स्थित गिरावड़ गाँव से प्रसारित इस मुख्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विशाल एल.ई.डी. स्क्रीन के माध्यम से किया गया। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने संत जी के वचनों को सुना और समाज सुधार के संकल्प लिए।
क्यों मिला ‘किसान संत गरीब दास गरिमा सम्मान’?
समारोह के मुख्य आकर्षण में संत रामपाल जी महाराज को आपदा काल के दौरान उनके अभूतपूर्व मानवीय कार्यों के लिए प्रतिष्ठित ‘किसान संत गरीब दास गरिमा सम्मान’ प्रदान किया गया। वक्ताओं ने उल्लेख किया कि जब हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान भीषण बाढ़ की चपेट में थे, तब संत जी के मार्गदर्शन में संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने संकटमोचक की भूमिका निभाई।
किसानों की फसल बचाने के लिए आश्रमों की ओर से निशुल्क भारी क्षमता वाले मोटर सेट, लाखों फीट पाइप और केबल उपलब्ध कराए गए। न केवल कृषि क्षेत्र में, बल्कि बस्तर (छत्तीसगढ़) और उत्तराखंड जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी चिकित्सा सहायता और राशन सामग्री पहुंचाकर संत जी के अनुयायियों ने मानवता की सेवा की मिसाल पेश की है।
सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने वेदों और शास्त्रों के प्रमाणों के साथ बताया कि पूर्ण परमात्मा ही जीवन के दुखों को समाप्त कर सकता है। उन्होंने ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 161, मंत्र 2) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कबीर साहेब ही वह समर्थ शक्ति हैं, जो प्रारब्ध के कर्मों को काटकर असाध्य रोगों से मुक्ति दिला सकते हैं।
कुरीतियों के विरुद्ध एक मौन क्रांति
संत जी के नेतृत्व में चल रहे समाज सुधार कार्यक्रमों की क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। उनके द्वारा चलाए जा रहे मुख्य अभियान निम्नलिखित हैं:
दहेज मुक्त भारत: सादगीपूर्ण ‘रमैणी’ विवाह (17 मिनट का विवाह) के माध्यम से हजारों परिवार फिजूलखर्ची और कर्ज के जाल से मुक्त हो रहे हैं।
व्यसन मुक्ति: लाखों युवाओं ने नशा त्याग कर एक स्वस्थ जीवन की शुरुआत की है।
रक्तदान महादान: आपात स्थिति में मानवता की जान बचाने के लिए संत जी के अनुयायी विश्व स्तर पर रक्तदान का कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं।
सम्मानों की गौरवशाली सूची
उल्लेखनीय है कि समाज के प्रति समर्पण के लिए संत रामपाल जी महाराज को पूर्व में भी ‘मानवता रक्षक सम्मान’, ‘धनाना रत्न’, ‘किसान मसीहा सम्मान’, ‘भारत गौरव अवॉर्ड’ और ‘जन सेवक रत्न’ जैसे अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
जैजैपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि अध्यात्म केवल एकांत साधना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा और राष्ट्र का वास्तविक उत्थान है। कार्यक्रम के अंत में हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रसाद ग्रहण किया और समाज को बुराइयों से मुक्त करने का संकल्प लिया।



