खाद घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग, विधानसभा में विधायक ब्यास कश्यप ने उठाए किसानों के मुद्दे..
ब्यास कश्यप ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और आदिम जाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए खाद वितरण में कथित घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की आत्मा खेती-किसानी में बसती है और प्रदेश के अधिकांश जनप्रतिनिधि भी किसान परिवारों से जुड़े हैं।
“मैं पहले किसान, बाद में विधायक”-विधानसभा में बोलते हुए विधायक कश्यप ने कहा कि वह स्वयं पहले किसान हैं और बाद में विधायक बने हैं। खेती उनकी पहचान है और मिट्टी से उनका गहरा जुड़ाव है। इसलिए किसानों की समस्याओं को वह बेहद करीब से महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को खाद-बीज की कमी और कालाबाजारी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
खाद वितरण में गड़बड़ी का आरोप-उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों में यूरिया का स्टॉक खत्म बताया जाता है, जबकि वही यूरिया खुले बाजार में लगभग 1500 रुपये प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है। विधायक ने कहा कि राज्य की खाद वितरण की नोडल एजेंसी मार्कफेड ने स्थानीय खाद कारखानों को दरकिनार कर राजस्थान की एक निजी कंपनी के खाद को सोसायटियों में भरपूर मात्रा में बिकवाया है।
उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में कमीशनखोरी हुई और निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) खाद की कीमत सहकारी समितियों के लिए 500 रुपये तय की गई है, जबकि वही खाद खुले बाजार में लगभग 450 रुपये में उपलब्ध है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या पिछले साल डीएपी की जगह किसानों को तीन बोरी एसएसपी इसी कमीशन के कारण बेचा गया था।
धान उत्पादन में गिरावट पर चिंता-जांजगीर-चांपा से आने वाले विधायक कश्यप ने कहा कि पूरे राज्य के साथ-साथ जांजगीर-चांपा जिले में भी धान उत्पादन में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राज्य सरकार 149 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान ही खरीद सकी।उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले में भी उत्पादन करीब साढ़े छह लाख मीट्रिक टन से घटकर लगभग 6 लाख 10 हजार मीट्रिक टन रह गया है। उनके अनुसार यह गिरावट इस बात का प्रमाण है कि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल पाई।
कृषि ऋण और बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल-विधायक ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले में पिछली सरकार के समय लगभग 184 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरण हुआ था, जबकि वर्तमान सरकार में यह घटकर करीब 164 करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने जिला सहकारी बैंक बिलासपुर में यूपीआई सुविधा नहीं होने की बात भी उठाई और कहा कि इससे किसानों और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना का नाम बदलकर कृषक उन्नति योजना कर दिया है, लेकिन बोनस भुगतान को लेकर बैंक व्यवस्था पूरी तरह सक्षम नहीं दिख रही है।
संतुलित खाद और पोषक तत्वों की मांग-विधायक कश्यप ने किसानों को केवल यूरिया ही नहीं बल्कि पोटाश, डीएपी, जिंक, मैंगनीज और अन्य माइक्रो न्यूट्रिएंट्स युक्त खाद उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी को पोषक तत्व नहीं मिलेंगे तो उत्पादन प्रभावित होगा और इसका असर आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा।
उन्होंने दलहनी और तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने तथा इनकी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अनुसार करने की भी मांग की।
मत्स्य पालन और मछुआरों के मुद्दे-मत्स्य पालन विभाग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले में बड़ी संख्या में बारहमासी पानी से भरे तालाब हैं, जहां मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मछली पालन के ठेकों को लेकर शासन को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए और मछुआरा समुदाय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।उन्होंने हाल में जिले में मछुआरा समुदाय द्वारा किए गए आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान 32 मछुआरों पर एफआईआर दर्ज हुई, जो उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाए और जिले में मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र खोला जाए।
पशुपालन और रोजगार पर भी उठाए मुद्दे-पशुपालन विभाग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोसली जैसी देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने गौठानों को चरागाह के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया।इसके साथ ही उन्होंने कृषि विभाग में रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की। उनका कहना था कि कृषि शिक्षा प्राप्त युवा रोजगार की उम्मीद में सरकार की ओर देख रहे हैं। यदि समय रहते भर्ती नहीं हुई तो युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है।विधायक कश्यप ने अंत में आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं को भी मजबूत करने और जनजातीय समुदाय के विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।



