इनहेलर के गलत इस्तेमाल से आपकी हड्डियां हो जाएंगी कमजोर, अस्थमा मरीजों के लिए डॉक्टरों का अलर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली सहित देशभर में बढ़ता वायु प्रदूषण अस्थमा व क्राॅनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पीड़ितों की इनहेलर पर निर्भरता भी लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इनहेलर जीवनरक्षक हैं, पर, उसका लंबे समय तक या गलत तरीके से उपयोग हड्डियों पर असर डाल सकता है, उन्हें कमजोर कर सकता है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन डाॅ. राजेश के चावला कहते हैं कि इनहेलर का सही और नियमित उपयोग ही सुरक्षित है ताकि साइड इफेक्ट्स को कम किया जा सके।
गर्मी शुरू होते ही बढ़ते हैं अस्थमा के केस
डाॅ. दविंदर कुंद्रा के अनुसार गर्मी आरंभ होते ही अस्थमा के मामलों में उछाल आया है। ओपीडी में मरीजों की संख्या में 70 से 80 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। हर 10 में से चार मरीज एक्यूट अस्थमा के हैं, जिनमें कई को आक्सीजन और कुछ को आइसीयू में भर्ती तक की आवश्यकता पड़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीजन बदलना, थंडर-स्टाॅर्म, कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी, वाहन प्रदूषण, कम हवा की गति और धूल भरा वातावरण इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं। प्रदूषक फेफड़ों की गहराई तक जाकर एयरवेज में स्पाज्म पैदा करते हैं, जिससे सांस फूलना, सीटी जैसी आवाज (वीजिंग), छाती में जकड़न और खांसी जैसे लक्षण उभरते हैं।
आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डाॅ. राज कुमार के अनुसार, प्रदूषण अस्थमा को तेजी से ट्रिगर कर रहा है विशेषकर बुजुर्ग, रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाएं, कम विटामिन डी या कैल्शियम लेने वाले और लंबे समय तक ओरल स्टेरायड लेने वाले मरीजों में हड्डियों पर दुष्प्रभाव काखतरा अधिक होता है।
सलाह दी है कि प्रदूषण और धूल से बचें, बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, इनहेलर नियमित लें और घर के अंदर वेंटिलेशन बेहतर रखें।



