Panchayat Secretary Regularization पंचायत सचिवों ने आदेश की प्रतियां जलाईं, शासकीयकरण की मांग पर अड़े
जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पंचायत सचिवों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शासकीयकरण की मांग को लेकर पंचायत सचिव संघ ने 17 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पंचायत संचालनालय द्वारा जारी आदेश की प्रतियां जलाकर सचिवों ने विरोध दर्ज कराया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह पैकरा ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिलासपुर दौरे का विरोध करेंगे।

Panchayat Secretary Regularization मोदी की गारंटी का हवाला देकर बीजेपी को घेरा
प्रदेश सचिव संघ का कहना है कि चुनाव से पहले भाजपा ने “मोदी की गारंटी” के तहत Panchayat Secretary Regularization करने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। अब पंचायत सचिव संघर्ष के लिए तैयार हैं और सिर्फ आश्वासन पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
राज्य सरकार के आदेश की प्रतियां जलाईं
हड़ताल के चलते राज्य सरकार ने जिला पंचायत सीईओ को पत्र जारी कर कार्य संपादन और निधि आहरण के निर्देश दिए थे, जिसका पंचायत सचिव संघ ने विरोध किया। सचिव संघ के सदस्यों ने इस आदेश की प्रतियां जलाईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
Panchayat Secretary Regularization संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा:
> “राज्य सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। हम शासकीयकरण की घोषणा के बिना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। अगर सरकार जल्द कदम नहीं उठाती, तो आगे उग्र आंदोलन होगा।”
हड़ताल से पंचायत कार्य प्रभावित 
पंचायत सचिवों की हड़ताल का असर जन्म-मृत्यु पंजीकरण, पेंशन योजनाएं, ग्रामीण विकास कार्यों और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है। कई पंचायतों में विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
1 अप्रैल को नई रणनीति होगी तैयार
संघ ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल को आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि राज्य सरकार तब तक उनकी मांगों को नहीं मानती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पंचायत सचिव अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और सरकार से ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।



