अगर आप भी पैंट के पिछले पॉकेट में पर्स रखते हैं तो तुरंत हटा लें, वरना वो परेशानी होगी जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते
क्या कभी आपने सोचा है कि पैंट के पिछली पॉकेट में आपने जो पर्स रखा हुआ है उससे सेहत को नुकसान भी हो सकता है. कौन सोचता है ऐसा. यकीनन आप नहीं सोचे होंगे लेकिन अब इस बात को गांठ बांध लीजिए पैंट की पिछली जेब में पर्स या वॉलेट रख रहे हैं तो इसका खामियाजा इतने चुपके से लेकिन इतना जोरदार भुगतना होगा जिसकी कल्पना आप कर भी नहीं सकते. ऑफिस में या गाड़ी में घंटों बैठे रहना इस आदत को और भी नुकसानदेह बना देता है. मेडिकल जर्नल और रिसर्च के अनुसार पिछली जेब में वॉलेट रखने से रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है. जिससे आपको साइटिका की बीमारी भी हो सकता है. इसे फैट वॉलेट सिंड्रोम कहा जाता है. कई तरह की रिसर्च में इस आदत के गंभीर प्रभावों की पुष्टि की गई है. रिसर्च कहती है कि वॉलेट चाहे मोटा हो या पतला अगर उसे लगातार पीछे की जेब में रखते हैं तो इससे नसों, मांसपेशियों और स्पाइन पर बार-बार दबाव पड़ता है, जो धीरे-धीरे कमर, कूल्हे और पैरों के गंभीर दर्द की वजह बन सकता है.
क्या दिक्कत होती है
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, जब हम पीछे वाली जेब में वॉलेट डालकर बैठते हैं, तो एक कूल्हा थोड़ा ऊपर उठ जाता है. देखने और सुनने में लग सकता है कि यह एक छोटी सी बात है, लेकिन इसका असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर काफी गहरा होता है. शरीर की असमान बैठने की स्थिति के कारण रीढ़ की हड्डी धीरे-धीरे एक तरफ झुकने लगती है. यह झुकाव इतना मामूली लगता है, पर समय के साथ यह रीढ़ की सही संरचना को बिगाड़ सकता है. जब शरीर का भार ठीक तरह से बराबर नहीं बंटता, तो कूल्हे, कमर और रीढ़ पर दबाव बढ़ जाता है. यह असंतुलन सिर्फ बैठने के समय ही नहीं, बल्कि चलने-फिरने और खड़े होने की पोजीशन को भी प्रभावित करता है. इसी कारण से लंबे समय तक इस आदत को बनाए रखने वालों को पीठ और कमर दर्द की शिकायतें ज्यादा होती हैं. साथ ही, मांसपेशियों में खिंचाव और नसों के दबाव के कारण साइटिका जैसे गंभीर दर्द भी हो सकते हैं. इसे मेडिकल भाषा में ‘फैट वॉलेट सिंड्रोम’ कहा जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है. जितना मोटा और भारी आपका वॉलेट होगा, उतना ही ज्यादा दबाव शरीर पर पड़ेगा, जिससे समस्या और बढ़ सकती है.
कैसे करें सुधार –
इंडियन एक्सप्रेस एवं बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती हैं. तीन महीने लगातार इस आदत को बनाए रखने से पीठ और पैरों में लगातार दर्द की शिकायतें आम होने लगती हैं. इस समस्या से बचने के लिए वॉलेट को आगे की जेब या बैग में रखना चाहिए. फिजियोथैरेपी एक्सरसाइज, पायरिफोर्मिस स्ट्रेचिंग और नियमित स्ट्रेचिंग से राहत मिल सकती है. यदि दर्द लगातार बना रहे तो डॉक्टर और स्पेशलिस्ट से संपर्क करना जरूरी है. स्टडी के अनुसार पुरुषों को सलाह दी जाती है कि वे वॉलेट का आकार, वजन कम रखें, बार-बार पोजीशन बदलें और लंबे समय तक बैठने से बचें. ध्यान रखें, इस नुकसान को रोकने का आसान तरीका है-वॉलेट आगे की जेब में या बैग में रखें.

