अंबेडकर जयंती पर जांजगीर में ऐतिहासिक शोभायात्रा और विचार गोष्ठी, हजारों लोग हुए शामिल
जांजगीर, 14 अप्रैल 2025/ भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर जांजगीर में ऐतिहासिक रैली एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। चर्च मैदान से रेलवे स्टेशन तक निकली भव्य शोभायात्रा में करीब 5000 लोगों ने नीले-सफेद परिधान में, झंडा-बैनर एवं पोस्टरों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। कचहरी चौक पर भव्य आतिशबाजी हुई तथा रैली का समापन बाबा साहब की प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ।
अनुसूचित जाति मंगल भवन में आयोजित विचार गोष्ठी में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। यहां समाज के सभी वर्गों के अंबेडकर अनुयायियों के लिए रात्रि भोज का आयोजन भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छ.ग. अजाक्स के प्रांताध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण भारती ने अंबेडकर को “युग पुरुष” बताते हुए निडर संघर्ष एवं सामाजिक एकता का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि सतनामी समाज अध्यक्ष महारथी बघेल ने उन्हें महान समाज सुधारक कहा जिन्होंने बहुजन समाज को गुलामी से मुक्ति दिलाई।
डॉ. कुंज किशोर ने अपने संबोधन में बच्चों को बाबा साहब से प्रेरणा लेने और विषम परिस्थितियों में भी शिक्षा से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने स्कूल-कॉलेज को “मंदिर” बताते हुए समाज के शिक्षित वर्ग से शैक्षणिक योगदान देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम संयोजक बी.आर. रत्नाकर, जिलाध्यक्ष अजाक्स ने बाबा साहब द्वारा शिक्षा, न्याय और समान अवसर के अधिकारों को दिलाने के संघर्ष को याद किया। संयुक्त आयोजन समिति अध्यक्ष अविनाश कुमार नेटी ने अंबेडकरवाद को “एक विचार शक्ति” बताते हुए इसे घर-घर तक पहुंचाने की अपील की।
कार्यक्रम में डॉ. अनिल जगत, डॉ. विष्णु पैगवार, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, नीलम सोनार, जितेंद्र पाटले, अक्षय कुमार कंवर, डॉ. कुंज किशोर, पद्मा बनर्जी सहित कई प्रमुख अतिथि उपस्थित रहे।
शोभायात्रा नेतृत्व में: अविनाश नेटी, बी.आर. रत्नाकर, विजय कुमार मनहर, एड. महारथी बघेल, लिलेश्वर रत्नाकर, सागर मोगरा सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि शामिल थे।
कार्यक्रम की सफलता में ए.डी. आजाद, डॉ. एस.एल. आग्रेय, रोहित खूंटे, जगजीवन बनर्जी, विपिन खांडेकर, रंजना खटकर, सरोज मनहर, तरुण नेताम, राजेंद्र ध्रुव, के.के. नवरंगे सहित अनेक महिला-पुरुष अधिकारियों, युवाओं और समाजसेवियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
यह आयोजन बाबा साहब के विचारों को जीवंत बनाए रखने और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया।



