इस जिले के 1118 किसान नहीं बेच पाएंगे धान, सामने आई ये चौंकाने वाली वजह! जानें
जांजगीर-चांपा। एग्रीस्टैक पोर्टल में किसान पंजीयन की तिथि 31 अक्टूबर को खत्म हो गई। अब किसान पंजीयन का काम नहीं होगा। पोर्टल में पंजीकृत किसान ही इस साल समर्थन मूल्य पर धान बेच पाएंगे। ऐसे में जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले में इस बार 1118 किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे। दोनों जिले में इतने किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन नहीं हुआ है।
एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन नहीं कराने वाले किसानों में जांजगीर-चांपा जिले में 555 तो सक्ती जिले में 563 किसान शामिल हैं। पंजीयन कराने कई बार तारीख बढ़ाई गई ताकि कोई भी किसान न छूटे। इसके बावजूद पिछले खरीफ सीजन में पंजीयन कराने वालों किसानों में इस साल 1118 किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन नहीं कराया। पंजीयन नहीं कराने के पीछे कई वजह बताई जा रही है। जिसमें प्रमुख वजह में जमीन बिक्री, गांव में रहना छोड़ चुके हैं, इस तरह की बातें सर्वे में सामने आई है।
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए इस बार जांजगीर-चांपा जिले में 1 लाख 23319 किसानों ने पंजीयन कराया है। वहीं सक्ती जिले में कुल पंजीकृत किसानों की संख्या 91526 है। इस तरह देखे तो पिछले साल की तुलना में धान बेचने वाले किसानों की संख्या में कमी आई है।
जांजगीर-चांपा में 5165 तो सक्ती में 3832 किसान बढ़े….
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए हर साल किसानों की संख्या बढ़ रही है। जांजगीर-चांपा जिले में इस बार 5165 नए किसान पहली बार धान बेचेंगे। वहीं सक्ती जिले में नए पंजीकृत किसान 3832 बढ़े हैं। 3100 समर्थन मूल्य मिलने से किसान अब धान की लगा रहे हैं। इससे हर साल नए किसान बढ़ रहे हैं।
जांजगीर-चांपा में 27% व सक्ती में 23% रकबा घटा
जांजगीर-चांपा जिले में इस बार धान का रकबा घटा है। जांजगीर-चांपा जिले में 27.51 प्रतिशत धान का रकबा कम हुआ है तो वहीं सक्ती जिले में 23.41 प्रतिशत धान का रकबा घटा है। यानी इतने रकबे में पिछले खरीफ सीजन की तुलना में धान की फसल कम लगी है। धान की वास्तविक खरीदी हो, इसके लिए सरकार ने इस बार डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी कराई है।



