नगर पंचायत नरियरा में सीसी रोड की गुणवत्ता पर सवाल: 6 महीने में उखड़ने लगी सड़क, पार्षदों ने ठेकेदार-इंजीनियर पर लगाए गंभीर आरोप
जांजगीर-चांपा। नगर पंचायत नरियरा में करीब छह महीने पहले बनाई गई सीसी रोड की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्षदों का आरोप है कि निर्माण के महज 15 दिन बाद ही सड़क जगह-जगह से टूटने और उखड़ने लगी थी। अब स्थिति यह है कि सड़क के कई हिस्सों में गिट्टियां और सीमेंट की परत उखड़ रही है।
पार्षदों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में कथित तौर पर मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण सड़क इतनी जल्दी खराब हो गई।
पहले भी की जा चुकी है शिकायत
पार्षदों के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में नगर पंचायत अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ताओं में पूर्व जिलाध्यक्ष आकाश सिंह सहित भाजपा पार्षद सासिदास महंत, दिलचंद बंजारे, सुशांत बंजारे, राजेश कुमार कैवर्त्य, पद्मश्री पाटले, सविता हरप्रसाद यादव, एल्डरमैन मनोज बंजारे, धीरेन्द्र कुमार निर्मलकर और कमलकांत साहू के नाम शामिल हैं।
शिकायत में नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों में बनाई गई सीसी सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई थी।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती का आरोप
पार्षदों का आरोप है कि सड़क खराब होने की जानकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दी गई और मरम्मत की मांग की गई। उनका कहना है कि आवेदन स्वीकार करने के बावजूद मौके पर प्रभावी मरम्मत कार्य नहीं कराया गया और अधिकारियों को मरम्मत किए जाने की जानकारी भेज दी गई।
पार्षदों ने आरोप लगाया है कि सड़क की वास्तविक स्थिति और अधिकारियों को भेजी गई जानकारी में अंतर है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग
गुणवत्ताहीन निर्माण का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने जिला कलेक्टर जांजगीर-चांपा और संबंधित विभाग को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। पार्षदों का कहना है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले में संबंधित नगर पंचायत अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार का पक्ष सामने नहीं आया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।



