दर्द से तड़पती रही प्रसूता… डॉक्टर बोले— “ब्लड कम है, ले जाइए
सरकारी वाहन नहीं मिला, ई-रिक्शा में ले जाते समय रास्ते में प्रसव
मितानिन पर लापरवाही का आरोप
कोरबा। अयोध्यापुरी दर्री में एक गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सकीय सुविधा न मिलने के कारण ई-रिक्शा में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। सुबह प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिजन उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने जांच के बाद कहा कि “ब्लड की कमी है, यहां प्रसव में जोखिम है, जिला मेडिकल कॉलेज ले जाइए।”
परिजन ने तत्काल सरकारी 108 वाहन के लिए फोन किया, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी वाहन नहीं पहुंचा। स्टाफ ने मजबूरी में एक ऑटो चालक को फोन कर बुलाया और प्रसूता को ई-रिक्शा से जिला मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
ई-रिक्शा में महिला के साथ उसका पति बाबूलाल विश्वकर्मा, दो बच्चे और मितानिन भी थीं, लेकिन महिला की गंभीर स्थिति देख मितानिन रास्ते में ही मौके से घर लौट गई, ऐसा आरोप पति ने लगाया है।
चलती ई-रिक्शा में दर्द बढ़ा और जन्म लिया बच्चे ने
दर्री से मेडिकल कॉलेज जाते समय बुधवारी के पास महिला की पीड़ा अचानक बढ़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही चलती ई-रिक्शा में प्रसूता ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। बच्चे की किलकारी से ई-रिक्शा गूंज उठा।
किसी तरह जिला मेडिकल कॉलेज के गेट पर पहुंचते ही स्टाफ ने प्रसूता व नवजात को तुरंत अंदर ले जाकर भर्ती किया। दोनों का इलाज जारी है।
परिजन बोले— मितानिन ने साथ छोड़ दिया, बड़ी लापरवाही
महिला के पति बाबूलाल विश्वकर्मा, जो पेशे से मिस्त्री हैं, ने बताया कि उनके पहले से दो बच्चे हैं और यह तीसरा प्रसव है। उन्होंने आरोप लगाया कि—
“मेरी पत्नी की हालत खराब थी, लेकिन मितानिन बीच रास्ते ही घर चली गई। सरकारी वाहन भी नहीं मिला, मजबूरी में ई-रिक्शा से जाना पड़ा। यह बड़ी लापरवाही है।”
स्थानीय लोगों में नाराजगी
घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती या स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव की सुविधा उपलब्ध होती, तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।


