चक्रवात दित्वाह ने श्रीलंका में मचाई तबाही, कम से कम 334 लोगों की मौत, 370 लापता
मौसम विभाग की ओर से चक्रवात दित्वाह को लेकर ताजा अपडेट दिया गया है। चक्रवात आज 1 दिसंबर को कमजोर होकर अवदाब में बदल गया। उत्तर तमिलनाडु–पुडुचेरी तट के समानांतर उत्तर की ओर बढ़ते हुए सुबह तक तट से लगभग 30 किमी दूरी पर रहेगा। सिस्टम पर करैक्काल और चेन्नई के डॉप्लर मौसम रडार (DWR) से नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवात के प्रभाव के कारण अगले 24 घंटे में कुड्डालोर, नागपट्टिनम, मयिलादुथुराई, विल्लुपुरम, चेंगलपट्टू के अलावा पुदुक्कोट्टई, तंजावुर, तिरुवरूर, अरियालुर, पेरम्बलुर, तिरुचिरापल्ली, चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और रानीपेट जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। पुडुचेरी और कराईकल में भी भारी बारिश के आसार हैं।
IMD के बुलेटिन के अनुसार, उत्तरी तटीय तमिलनाडु और पुडुचेरी में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। मछुआरों से कहा गया है कि समुद्र में उतरे मछुआरों को 1 दिसंबर तक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और तमिलनाडु, पुडुचेरी, दक्षिण आंध्र प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए। आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वी अनीता ने गुंटूर जिले के सचिवालय से नेल्लोर, तिरुपति, कडप्पा, चित्तूर और अन्नामय्या जिलों के कलेक्टरों के साथ चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को 48 घंटे तक हाई अलर्ट पर रहने और सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों के स्कूलों को बंद रखने के निर्देश भी जारी किये है।
चक्रवात दित्वाह का नाम कैसे पड़ा: अब चक्रवात दित्वाह के नाम की बात करें तो इसका मतलब है ‘लैगून’। यह नाम यमन द्वारा साइक्लोन नेमिंग सिस्टम के तहत प्रस्तावित किया गया था। यह नाम यमन के सोकोत्रा द्वीप पर स्थित डेट्वा लैगून से लिया गया है। यह जगह अपने दुर्लभ और आकर्षक तटीय इकोसिस्टम के लिए जानी जाती है।



