मुंबई में BJP गठबंधन की ‘महा-बढ़त’, BMC में पहली बार बहुमत, ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का आखिरी किला भी ढहा!
मुंबई: मुंबई का नई बॉस बीजेपी बनने जा रही है. बीजेपी को बीएमसी में पहली बार बहुमत मिलता दिख रहा है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए काउंटिंग जारी है और बीजेपी 88 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं, बीजेपी समर्थित पार्टी शिवसेना (शिंदे गुट) 31 सीटों पर आगे चल रही है. बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है और महायुति 119 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. ऐसे में बीजेपी के खेमे में खुशी का माहौल है. मुंबई पर पिछले 25 सालों से शिवसेना (अविभाजित) का कब्जा रहा है. पिछली बार 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में बीजेपी 82 और शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं. लेकिन इस बार बाजी पलट सकती है. बीएमसी चुनाव को लेकर आए एग्जिट पोल्स के सुझान कुछ इस ओर ही इशारा कर रहे थे. मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 52.94% मतदान हुआ है.
10 प्रमुख महानगरपालिकाओं के आंकड़े
- छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका- 59.82%
- पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका- 57.71%
- नवी मुंबई महानगरपालिका- 57.15%
- वसई-विरार महानगरपालिका- 57.12%
- ठाणे महानगरपालिका- 55.59%
- मुंबई महानगरपालिका (BMC)- 52.94%
- पुणे महानगरपालिका- 52.42%
- नागपुर महानगरपालिका- 51%
- मीरा-भाईंदर महानगरपालिका- 48.64%
- कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका- 45%
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना गठबंधन की भारी जीत तय मानी जा रही है. विभिन्न मतदान एजेंसियों के एग्जिट पोल्स के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ‘एकजुट’ ठाकरे बंधुओं को इस चुनाव में कड़ी चुनौती के बावजूद खास सफलता नहीं मिलती दिख रही है. कम से कम दो एग्जिट पोल्स ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन के लिए स्पष्ट और निर्णायक जनादेश का अनुमान लगाया है. इन अनुमानों के मुताबिक, ठाकरे बंधु बड़े अंतर से पीछे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन एक बार फिर कमजोर प्रदर्शन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.
एग्जिट पोल्स के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन उत्तर और दक्षिण भारत से आए प्रवासी मतदाताओं की पहली पसंद बनकर उभरा है. इसके अलावा, मराठा वोटों का बड़ा हिस्सा भी इस गठबंधन को मिलने की संभावना जताई गई है. वहीं, ठाकरे चचेरे भाई मराठी और मुस्लिम वोटों को भी पूरी तरह एकजुट करने में नाकाम नजर आ रहे हैं. शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) गठबंधन पर इन वर्गों का भरोसा पूरी तरह बनता नहीं दिख रहा है. जेवीसी के अनुसार, भाजपा–शिवसेना गठबंधन 138 वार्डों में जीत दर्ज कर सकता है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) को 59 वार्ड मिलने की संभावना है. कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन काफी पीछे बताया गया है और उसके खाते में केवल 23 वार्ड आने का अनुमान है.
1889 में स्थापित बीएमसी केवल एक स्थानीय निकाय नहीं है. यह भारत का सबसे धनी निगम है. 74,000 करोड़ रुपए से अधिक के वार्षिक बजट के साथ, इसकी वित्तीय क्षमता गोवा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों से भी अधिक है. बीएमसी के राजस्व स्रोतों में प्रॉपर्टी टैक्स शामिल है, जो आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों से लिया जाता है. इसके अलावा सर्विस टैक्स, जैसे पानी का टैक्स, सीवरेज टैक्स और पार्किंग टैक्स भी शामिल हैं. विकास शुल्क में भवन निर्माण अनुमतियों और बुनियादी ढांचे के प्रीमियम से प्राप्त राशि शामिल है. इतना बड़ा राजस्व आधार बीएमसी को राज्य सरकार से स्वतंत्र रूप से बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चलाने की अनुमति देता है, जिससे इसका नियंत्रण किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति बन जाता है.



