99 फीसदी लोगों को इन चार वजहों से आता है हार्ट अटैक! जानिए क्या कहते है विशेषज्ञ
भारत में दिल के दौरे मौत का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहे हैं. 2014 से 2019 के बीच, देश में हार्ट अटैक की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. अर्बनाइजेशन, बदलती लाइफस्टाइल, खान-पान की गलत आदतें, स्ट्रेस, स्मोकिंग और डायबिटीड जैसी बीमारियां इसके प्रमुख कारण हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पारिवारिक स्थिरता और कामकाजी जीवन को भी प्रभावित कर रही है. हार्ट अटैक आने के चार मुख्य कारणों की पहचान की गई है. आइए इन पर गौर करें…
हार्ट अटैक क्यों आता है?
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियां (कोरोनरी धमनियां) किसी रुकावट के कारण ब्लॉक हो जाती हैं, जो अक्सर खून के थक्के या आर्टरी की दीवारों पर जमे प्लाक के कारण होता है. इससे दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे सेल्स मर जाती हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल के दौरे, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर अक्सर अचानक नहीं होते. उनका कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और स्मोकिंग, ये सभी हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं.
डॉक्टरों के अनुसार, ज़्यादातर लोगों को पहली बार अचानक दिल का दौरा नहीं पड़ता. कई मामलों में, कुछ साइलेंट रिस्क फैक्टर्स भी होते हैं. ये साइलेंट रिस्क फैक्टर्स तब तक स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते जब तक कि हार्ट अटैक की घटना न हो जाए. इनमें शामिल है…
- हाई ब्लड प्रेशर- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, क्रोनिक हाई ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है. जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है और दिल का दौरा या स्ट्रोक हो सकता है.
- कोलेस्ट्रॉल – ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मुताबिक, खून में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की बढ़त से धमनियों में फैट जमा हो जाती है, जिससे प्लाक नामक वसायुक्त गांठें बन जाती हैं. इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. यह प्लाक धमनियों को संकरा और कठोर बना देता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है और दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
- डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के मुताबिक, हाई ब्लड शुगर सेल्स को कमजोर कर देती है, जिससे हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
- स्मोकिंग – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, तंबाकू दिल और आर्टरी दोनों को नुकसान पहुंचाता है. तंबाकू के सेवन से ब्लड वेसेल्स संकरी हो जाती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट रेट तेज हो जाती है, जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. तंबाकू धमनियों में फैट (प्लाक) के जमाव को तेज करता है, जिससे दिल में खून का फ्लो कम हो जाता है और यह दिल के रोगों का एक मुख्य कारण बनता है.
ये सभी फैक्टर्स एक साथ काम करते हैं. लेकिन लक्षण तभी दिखाई देते हैं जब खतरा पहले से ही ज्यादा हो. इसलिए, नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना बहुत जरूरी है.
दिल के दौरे के खतरे को कैसे कम करें?
अच्छी खबर यह है कि इनमें से ज्यादातर खतरे को कंट्रोल किया जा सकता है. हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और मेडिकल जांच से दिल के दौरे का खतरा काफी कम हो सकता है. इसके लिए आपको अपने खान-पान में कुछ बदलाव करने होंगे. फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट डाइट में शामिल करें. इसके अलावा, रोजाना कम से कम 30 मिनट हल्का व्यायाम करें, जैसे टहलना या योग.
जितना हो सके स्मोकिंग छोड़ दें. तंबाकू का सेवन तुरंत छोड़ने से दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है. कई स्ट्रोक और दिल के दौरे लोगों की लापरवाही के कारण होते हैं. क्योंकि ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते हैं. समय पर जांच कराने से डॉक्टरों को शुरुआती दौर में ही इलाज मिल जाता है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों या जिनके परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित रूप से कुछ हेल्थ चेकअप करवानी चाहिए.
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