बलेनो विवाद की क्या है कहानी 4 घंटे हिरासत में FIR दर्ज नहीं क्या था कारण पुरी खबर
बिलासपुर। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में बलेनो कार विवाद से जुड़ा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शो–रूम से सुमित साहू को बलेनो कार समेत थाने लाकर करीब 24 घंटे तक हिरासत में रखा गया। रात में थाना प्रभारी सुमंत साहू ने स्पष्ट कहा था—“420 का मामला है, आरोपी को नहीं छोड़ा जाएगा।” लेकिन सुबह होते ही बिना FIR दर्ज किए न केवल आरोपी को छोड़ दिया गया, बल्कि बलेनो कार भी वापस सौंप दी गई।
जानकारी के अनुसार, यह मामला अंबिकापुर जिले की एक महिला से संबंधित है। न प्रार्थी इस थाना क्षेत्र का था और न ही वाहन लेन–देन की घटना यहां घटी, फिर भी सिविल लाइन पुलिस की सक्रियता ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने एक पुराने आवेदन का हवाला देकर आरोपी को जेल भेजने की धमकी दी, लेकिन अंततः न केस दर्ज हुआ और न ही कोई कानूनी कार्रवाई।
सबसे अहम सवाल यह भी है कि क्या आरोपी को पकड़ने से पहले रोजनामचा (दैनिक डायरी) में रवानगी और वापसी की प्रविष्टि दर्ज की गई थी? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह पुलिस मैनुअल का उल्लंघन है और आरोपी की हिरासत को अवैध ठहराता है। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति आरोपी को अदालत से तत्काल राहत और पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई का आधार दे सकती है।
फिलहाल चर्चा का विषय थाने में दो दिन से खड़ी हुंडई वेन्यू (CG 14 MM 3710) है। स्थानीय लोगों का सवाल है—क्या इस पर FIR दर्ज होगी या यह भी बलेनो की तरह “सेटिंग” के सहारे बाहर निकल जाएगी?
कानूनविदों का मानना है कि यदि मामला वाकई धोखाधड़ी का था, तो FIR और न्यायिक प्रक्रिया अनिवार्य थी। और यदि मामला नहीं था, तो 24 घंटे हिरासत में रखना कानूनी दृष्टि से गलत है।
गौरतलब है कि हाल ही में कोतवाली थाना प्रभारी को लापरवाही के मामले में एसएसपी ने लाइन हाजिर किया था। अब देखना यह है कि सिविल लाइन थाने के इस प्रकरण पर वरिष्ठ अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं।



