1 सितंबर से बंद हो जाएगी कैशलेस इलाज की सुविधा! हरकत में आई सरकार, क्या है पूरा मामला?
नई दिल्ली: अगस्त 2025 के अंत में कुछ अस्पतालों द्वारा कैशलेस सर्विसेज के निलंबन की खबर के बीच इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) इस विवाद की निगरानी और समाधान को लेकर आगे आ गया है। सूत्रों के अनुसार इरडा ने साफ बता दिया है कि रेगुलेटर के मौजूदा निर्देश नेटवर्क अस्पतालों को कैशलेस सर्विस से इनकार करने से रोकते हैं। बीमा कंपनियों को नियमों को न मानने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बाध्य करते हैं।
सूत्रों के अनुसार इरडा द्वारा हॉस्पिटल-इंश्योरर के बीच कैशलेस सस्पेंशन इश्यू को मॉनिटर करने के बीच आनन-फानन में इंश्योरर्स और अस्पतालों के बीच विवाद को सुलझाने के प्रयास तेज हो गए। उधर, बजाज आलियांज के सीईओ तपन सिंघल ने कैशलेस इलाज विवाद पर बयान जारी किया और कहा, ‘हमें कैशलेस दावे से इनकार का अब तक एक भी मामला नहीं मिला है…हम हमेशा अपने देश के नागरिकों के हित में खड़े हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे ग्राहक को अस्पताल में भुगतान से करने से पहले ही उसके खाते में पैसे आ जाएं।
क्या है मामला?
15,000 से ज्यादा भारतीय अस्पतालों ने 1 सितंबर, 2025 से बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस पॉलिसीधारकों के लिए भुगतान में देरी और अपर्याप्त रिन्बर्समेंट के कारण कैशलेस उपचार बंद कर देने की बात कही है। इतना ही नहीं अस्पतालों ने अन्य बीमा कंपनियों को भी कैशलेस ट्रीटमेंट सस्पेंड करने की बात कही है। केयर हेल्थ को भी ऐसा नोटिस दिया गया। इस निर्णय के कारण मरीजों को पहले भुगतान करना होगा और बाद में रिन्बर्समेंट लेनी होगी।
इन अस्पतालों का प्रतिनिधित्व करने वाली असोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) का कहना है कि यह कदम रिन्बर्समेंट रेट्स, भुगतान में देरी और क्लेम सेटलमेंट प्रैक्टिसेज पर बीमाकर्ता के साथ लंबे समय से चल रहे विवादों के बाद उठाया गया है। AHPI के अनुसार, बजाज आलियांज द्वारा दी जाने वाली रिन्बर्समेंट दरों को वर्षों से अपडेट नहीं किया गया है। अस्पतालों का यह भी आरोप है कि बीमाकर्ता एकतरफा कटौती करता है और अक्सर दावों के निपटान में देरी करता है, जिससे स्वास्थ्य सर्विस प्रोवाइडर्स पर वित्तीय दबाव पड़ता है।
क्या है नियम?
बीमा कंपनियों का टर्नअराउंड समय सख्त होता है, आमतौर पर एक घंटे के भीतर प्राधिकरण और डिस्चार्ज के तीन घंटे के भीतर निपटान की आवश्यकता होती है। यदि कोई अस्पताल कैशलेस सुविधा देने से इनकार करता है, तो उसे बीमा कंपनी के शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। अस्पताल कैशलेस सेवाएं प्रदान करने के लिए बीमा कंपनियों के साथ समझौतों से बंधे होते हैं।



