H1B Visa को लेकर बड़ी खबर, US का नया बयान आया सामने, पहली बार ही देनी होगी 88 लाख फीस, यह अमेरिकियों की नौकरी बचाएगा
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने रविवार को सोशल मीडिया X पर को H-1B वीजा से जुड़ी कई जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि 88 लाख रुपए फीस सालाना नहीं लगेगी। यह वन टाइम फीस है, जो सिर्फ एप्लिकेशन देते समय लगेगी।
लेविट ने कहा- यह बदलाव लॉटरी से निकाले गए नए वीजा पर लागू होंगे। पुराने वीजा होल्डर्स, रिन्युअल या 21 सितंबर से पहले अप्लाई करने वालों के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। H-1B वीजा होल्डर देश से बाहर जा सकते हैं और वापस भी आ सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार सुबह H-1B वीजा के लिए एप्लिकेशन फीस 88 लाख रुपए कर दी थी। इसके बाद मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी टेक कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों से रविवार तक अमेरिका वापस लौटने को कहा था।
वहीं, व्हाइट हाउस ने ट्रम्प के H-1B वीजा आवेदनों पर फीस बढाने का समर्थन करने के लिए एक ‘फैक्ट शीट’ जारी की। इसमें बताया गया कि इस कदम से अमेरिकी लोगो की नौकरियां सुरक्षित होंगी, क्योंकि विदेशी कर्मचारी कम वेतन पर अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं।
विदेशियों को सस्ते दाम पर रख, अमेरिकियों को निकाल रही कंपनियां
व्हाइट हाउस ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2003 में H-1B वीजा धारकों की हिस्सेदारी 32% थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर 65% से अधिक हो गई है।
कंप्यूटर साइंस के नए ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 6.1% और कंप्यूटर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स में 7.5% है, जो बायोलॉजी या आर्ट हिस्ट्री के ग्रेजुएट्स से दोगुना है।
2000 से 2019 तक विदेशी STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई, जबकि कुल STEM रोजगार में केवल 44.5% की वृद्धि हुई।
व्हाइट हाउस ने कुछ कंपनियों के उदाहरण दिए, जिन्होंने H-1B कर्मचारियों को कम सैलरी पर काम पर रखा और अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। एक कंपनी को 2025 में 5,189 H-1B वीजा मिले, लेकिन उसने 16,000 अमेरिकी कर्मचारियों को निकाल दिया।
एक अन्य कंपनी को 1,698 H-1B वीजा मिले, लेकिन उसने ओरेगन में 2,400 अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला। तीसरी कंपनी ने 2022 से 27,000 अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया, जबकि उसे 25,075 H-1B वीजा मिले
अमेरिकियों की नौकरी बचाने के लिए कदम उठाया
व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रम्प का यह कदम अमेरिकी कामगारों को पहले स्थान पर रखने और बेरोजगारी से निपटने के लिए है।
बयान में कहा गया, “ट्रम्प से लोगों ने अमेरिकियों को प्राथमिकता देने की मांग की है। उन्होंने नए व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका में नौकरियां वापस लाने में सफलता हासिल की है।”
व्हाइट हाउस ने यह भी बताया कि ट्रम्प के दोबारा कार्यकाल शुरू करने के बाद सभी नई नौकरियां अमेरिकी मूल के कामगारों को मिली हैं, जबकि पिछले साल जो बाइडेन के कार्यकाल में इस दौरान सभी नौकरियां विदेशी मूल के कामगारों को गई थीं।
फंसने के डर से वापस लौटने लगे थे कर्मचारी
नई फीस लागू होने के कारण इमिग्रेशन अटॉर्नी और कंपनियों ने H-1B वीजा धारकों या उनके परिवारों से कहा कि जो अभी अमेरिका से बाहर हैं, वे अगले 24 घंटों के भीतर वापस आ जाएं, नहीं तो उनके फंसने की आशंका है।
कंपनियों को डर था कि अगर उन्होंने रविवार तक H-1B वीजा धारकों को नहीं बुलाया तो उन्हें वापस अमेरिका बुलाने के लिए एक लाख डॉलर देने पड़ेंगे। दिवाली पर भारत आने का प्लान बना रहे H-1B वीसा वाले कई लोगों ने ऐन वक्त पर अपने टिकट कैंसिल कराए।
वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क जैसे प्रमुख एयरपोर्ट पर कई लोग टिकट रद्द कराते देखे गए। इधर, दिल्ली एयरपोर्ट पर भी कई लोग अमेरिका जाने के लिए फ्लाइट का इंतजार करते देखे गए।



