गैस लेकर आ रहे रूसी टैंकर को खरीदने से भारत ने किया इनकार, ऊर्जा संकट के बीच क्यों लिया यह फैसला?
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट के कारण दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस संकट की आंच भारत तक भी पहुंची है। होर्मुज में नाकेबंदी के कारण भारत ने रूस समेत दूसरे देशों से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। लेकिन अब भारत ने बड़ा फैसला लिया है। भारत ने रूस के उन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) जहाजों को खरीदने से इनकार कर दिया है, जिन पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हैं। भारत के इस कड़े रुख के बाद रूस का एक बड़ा गैस जहाज फिलहाल समुद्र के बीच फंसा हुआ है।
सिंगापुर के पास फंसा रूसी जहाज
रूस के पोरतोवाया एलएनजी प्लांट से निकला 1,38,200 घन मीटर गैस वाला टैंकर कुनपेंग (Kunpeng) गुजरात के दाहेज एलएनजी टर्मिनल के लिए रवाना हुआ था। चूंकि इस पर अमेरिकी बैन लगा है। ऐसे में भारत ने इसे खरीदने से इंकार कर दिया है। ऐसे में यह जहाज अब सिंगापुर के पास बिना किसी निश्चित गंतव्य के खड़ा है। हालांकि दस्तावेजों में इसे गैर-रूसी कार्गो दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्लोबल ट्रैकिंग सिस्टम ने इसकी पहचान उजागर कर दी।
रूस के उप ऊर्जा मंत्री का भारत दौरा
रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने 30 अप्रैल को नई दिल्ली का दौरा किया था। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ लंबी चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल वही रूसी ईंधन खरीदेगा जो कानूनी रूप से प्रतिबंधों के दायरे से बाहर है। सोरोकिन के जून में फिर से भारत आने की संभावना है।
कच्चे तेल की खरीद जारी
भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, लेकिन LNG के मामले में स्थिति अलग है। इसके ये प्रमुख कारण सामने आए हैं:
- एलएनजी जहाजों को सैटेलाइट के जरिए ट्रैक करना बहुत आसान है, जिससे प्रतिबंधों से बचना मुश्किल हो जाता है।
- कच्चे तेल को समुद्र के बीच दूसरे जहाज में ट्रांसफर करके उसकी पहचान छुपाना संभव है, लेकिन एलएनजी के साथ ऐसा करना तकनीकी रूप से बहुत कठिन है।
भारत के साथ संबंधों पर जोर
रूस भारत के साथ लंबे समय के लिए एलएनजी सप्लाई और फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट (पोटाश, फास्फोरस और यूरिया) करने की कोशिश कर रहा है। ईरान युद्ध से पहले भारत रूस से काफी मात्रा में ईंधन खरीद रहा था। भारत अपनी गैस जरूरतों का 50% हिस्सा आयात करता है, जिसका लगभग 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है।



