आपको कभी टाइप-2 डायबिटीज होगा या नहीं? लक्षण दिखने से कई साल पहले ही चल जाएगा इसका पता
डायबिटीज या मधुमेह की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं। टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के कारण होने वाली ये बीमारी अब बुजर्गों और युवाओं के साथ बच्चों को भी शिकार बना रही है। टाइप-2 डायबिटीज पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसे कंट्रोल न किया जाए तो समय के साथ आंखों, किडनी, हार्ट और कई अन्य अंगों को इससे नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई लोगों को तब तक इस बीमारी का पता नहीं चल पाता जब तक ब्लड शुगर काफी बढ़कर अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू न कर दे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उन्हें इसे कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
अगर आपको अभी डायबिटीज नहीं है, तो भविष्य में इसके होने का खतरा कितना है, क्या इसका पता लगाया जा सकता है?
टाइप-2 डायबिटीज और इसके जोखिम
टाइप-2 डायबिटीज की समस्या तब होती है जब शरीर इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बन पाता। लगातार हाई कैलोरी डाइट, ज्यादा शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन, शारीरिक गतिविधि कम होना और मोटापा जैसी स्थितियां इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा देती हैं। फैमिली हिस्ट्री यानी जिनके माता-पिता को डायबिटीज है, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।
अगर आपको अभी शुगर की बीमारी नहीं है तो क्या भविष्य में हो सकती है? इसका पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने एक खास ब्लड टेस्ट के बारे में बताया है जिसकी मदद से आप इस जोखिम का पता लगा सकते हैं।
ब्लड टेस्ट से लगा सकेंगे डायबिटीज के जोखिमों का पता
शोधकर्ताओं ने खून में कुछ खास मार्करों पर दशकों तक अध्ययन किया, जिसके आधार पर एक ऐसे आसान ब्लड टेस्ट के बारे में बताया है जो लक्षण दिखने से कई साल पहले ही आपमें डायबिटीज के खतरे का पता लगा सकता है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 26 साल के फॉलो-अप अध्ययन में खून में 235 ऐसे मॉलिक्यूल्स की पहचान की है जो टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े होते हैं।
ब्लड टेस्ट में इनकी पहचान से डायबिटीज के खतरों का पता लगाया जा सकेगा। इससे दिल की बीमारी, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसी बाद की दिक्कतों का खतरा भी कम हो सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं ने 10 अलग-अलग अध्ययनों में शामिल 23,634 ऐसे प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल का परीक्षण किया, जिन्हें शुरू में डायबिटीज की समस्या नहीं थी। टीम ने जेनेटिक और लाइफस्टाइल डेटा का भी आकलन किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से ब्लड मार्कर जेनेटिक थे और कौन से एनवायरनमेंटल।
कुल 469 सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट्स का अध्ययन किया जिसमें से 235 को टाइप 2 डायबिटीज से जोड़ा गया।
फॉलो-अप के दौरान, 4,000 प्रतिभागियों में टाइप 2 डायबिटीज का पता चला।
टीम ने बताया कि ब्लड टेस्ट में अगर सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट्स का पता लगा लिया जाए तो भविष्य में किसे डायबिटीज का होगा, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
आपको डायबिटीज है या नहीं? इसका कैसे पता लगाएं
क्या बिना किसी जांच और पैसा खर्च किए,घर बैठे ही यह जाना जा सकता है कि आपको शुगर की बीमारी है या नहीं?
इसके लिए डॉक्टरों ने 4T फॉर्मूला के बारें बताया है जिसकी मदद से डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। 4-T फॉर्मूला दरअसल चार अंग्रेजी अक्षरों पर आधारित है, जो डायबिटीज के सामान्य और शुरुआती लक्षणों की ओर इशारा करता है। अगर आप भी घर बैठे शुगर की बीमारी का पता लगाना चाहते हैं
क्या है ये 4-T फॉर्मूला?
4-T फॉर्मूला दरअसल चार अंग्रेजी अक्षरों पर आधारित है, जो डायबिटीज के सामान्य और शुरुआती लक्षणों की ओर इशारा करता है।
T- Toilet यानी बार-बार पेशाब आना।
T-Thirst यानी अत्यधिक प्यास लगना
T- Tiredness यानी लगातार थकान महसूस होना।
T-Thinning यानी वजन तेजी से घटना।
पहला T (Toilet) डॉक्टर कहते हैं, हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि वह खुद की सुरक्षा आसानी से कर सकता है। डायबिटीज में जब ब्लड शुगर बढ़ने लगता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण ये ऊर्जा में परिवर्तित होने के लिए कोशिकाओं में नहीं जा पाता है, तो हमारा शरीर किडनी को काम पर लगा देता है।
किडनी अतिरिक्त शुगर यानी ग्लूकोज को शरीर से बाहर निकालने के लिए पेशाब की मात्रा बढ़ाने लगती है जिसके कारण आपको बार-बार पेशाब आता है।
दूसरा T (Thirst) जब शरीर से बार-बार पेशाब के जरिए अतिरिक्त ग्लूकोज और पानी बाहर निकलता है तो इसके कारण आपको ज्यादा प्यास लगने लगती है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों को अक्सर प्यास लगी रहती है।
तीसरा T (Tiredness) शरीर को काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो हमें ग्लूकोज से मिलती है। डायबिटीज में ग्लूकोज कोशिकाओं में सही तरीके से पहुंच नहीं पाता है जिससे कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं। शरीर में ग्लूकोज यानी ऊर्जा की कमी होने के कारण रोगी को अक्सर थकान की दिक्कत बनी रहती है।
चौथा T (Thinning) शरीर की कोशिकाओं के पास ग्लूकोज नहीं है, पर ये खून में घूम रहा है जो कोशिकाओं के किसी काम का नहीं है। ऐसे में शरीर की कोशिकाएं दूसरे माध्यम से ग्लूकोज प्राप्त करने की कोशिश करने लगती हैं। इस स्थिति में हमारी कोशिकाएं शरीर के फैट और प्रोटीन को तोड़ने लगती हैं और वहां से ऊर्जा बनाती हैं। इस वजह से शरीर का फैट और प्रोटीन दोनों खर्च होने लगता है यही कारण है शरीर पतला हो जाता है और तेजी से वजन घटने लगता है।
अगर आपको भी इन चारों में से दो-तीन दिक्कतें भी अक्सर महसूस होती रहती हैं तो सावधान हो जाइए। ये डायबिटीज का संकेत हो सकता है। समय रहते डॉक्टर से मिलकर HBA1C जांच और इलाज कराएं।