राम मंदिर का निमंत्रण ठुकराया, PM मोदी के खिलाफ उतारा उम्मीदवार, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हमेशा दिखाए तेवर
प्रयागराज: माघ मेले में मौनी अमावस्या पर्व पर स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। शंकराचार्य स्नान से वंचित रह गए, इसको लेकर विवाद बढ़ गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पुलिस और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हुए हैं। यह पहला मौका नहीं जब उनका विवादों से पाला पड़ा हो।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था। वह उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। उन्हें स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद ज्योतिष पीठ का नया शंकराचार्य बनाया गया था।
छात्रसंघ चुनाव भी लड़ चुके हैं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 2006 में स्वामी स्वरूपानंद से दीक्षा ली थी। वह ज्योतिष पीठ के 46वें शंकराचार्य हैं। यूपी के प्रतापगढ़ के पट्टी तहसील स्थित ब्राह्मणपुर गांव में जन्मे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दीक्षा लेने से पहले नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने छात्र राजनीति भी की है। 1994 में उन्होंने छात्र संघ चुनाव में जीत हासिल की थी।
केदारनाथ से 228 किलो सोना गायब होने का लगाया था आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयानों के चलते अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। उन्होंने केदारनाथ से 228 किलोग्राम सोना गायब होने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि केदारनाथ से 228 किलोग्राम सोना गायब है। कोई जांच शुरू नहीं हुई है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
पीएम मोदी के खिलाफ उतारा था उम्मीदवार
राजनीतिक बयानबाजी के लिए चर्चित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी क खिलाफ समर्थित उम्मीदवार उतारा था, लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली। वर्ष 2008 में उन्होंने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने के लिए अनशन किया था।



