DCS और PV ऐप की गड़बड़ियों पर पटवारी संघ ने उठाए सवाल, किसानों को नुकसान की आशंका
फसल सर्वे में गलत प्रविष्टियों की आशंका, धान खरीदी और फसल बीमा पर पड़ सकता है असर; तकनीकी खामियां दूर करने शासन-प्रशासन से की मांग
जांजगीर-चांपा। जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) और PV ऐप के माध्यम से फसल प्रविष्टि एवं भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर राजस्व पटवारी संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ ने 23 अक्टूबर 2026 को ज्ञापन जारी कर मुख्यमंत्री, कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों का ध्यान तकनीकी खामियों तथा किसानों को होने वाली संभावित परेशानियों की ओर आकर्षित किया है। इधर, अपनी मांगों को लेकर पटवारियों की हड़ताल जारी रहने से राजस्व विभाग का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
फसल सर्वे में गलत प्रविष्टियों की आशंका
राजस्व पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सर्वे के दौरान दर्ज की जा रही जानकारी और खेतों की वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आने की आशंका है। कुछ स्थानों पर फसल लगी भूमि को पड़त तथा पड़त भूमि को फसल वाली भूमि के रूप में दर्ज किए जाने की समस्या हो सकती है।
संघ का कहना है कि यदि फसल संबंधी जानकारी में त्रुटियां रह जाती हैं, तो किसानों को धान खरीदी, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा राहत और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
DCS और PV ऐप की कार्यप्रणाली पर सवाल
संघ ने DCS और PV ऐप में तकनीकी समस्याओं, डेटा अपलोड करने तथा गलत प्रविष्टियों में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई है। संघ के अनुसार, सर्वे में इस्तेमाल की जा रही तकनीक, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
ज्ञापन में वर्ष 2023 के नक्शों के आधार पर सर्वे किए जाने और खेतों की वर्तमान भौतिक स्थिति के बीच अंतर होने की आशंका भी व्यक्त की गई है। संघ ने मांग की है कि किसानों को अपने खाते में दर्ज फसल संबंधी जानकारी देखने और गलत प्रविष्टियों में सुधार कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
तकनीकी खामियां दूर करने की मांग
राजस्व पटवारी संघ ने शासन-प्रशासन से DCS और PV ऐप की तकनीकी खामियों की समीक्षा कराने, त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों में सुधार की व्यवस्था बनाने तथा मैदानी कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि फसल सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसानों के हित प्रभावित न हों और उन्हें शासन की कृषि योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



