काशी में कुदरत का कहर, आंखों के सामने ढही सपनों की दीवारें; गंगा में समाया आशियाना
वाराणसी में गंगा किनारे बसे ढाब क्षेत्र में इन दिनों हर किसी की आंखों में चिंता और चेहरे पर बेबसी साफ झलक रही है। कभी जिस मिट्टी में किसान अपनी मेहनत का पसीना बहाकर अन्न उपजाते थे, उसी मिट्टी को आज गंगा की तेज धार लील रही है। खेत, बाग-बगीचे, हरियाली और अब तो घर तक गंगा में समाहित हो रहे हैं।
रविवार को गोबरहा निवासी श्याम बिहारी और लाल बिहारी का पक्का मकान कटान की चपेट में आकर गंगा की धारा में बह गया। परिवार के लोग सिर्फ सामने खड़े होकर अपने आशियाने को पानी में समाते देखते रह गए। उनकी आंखों के सामने पीढ़ियों की मेहनत और सपनों की दीवारें ढह गईं।
इसी गांव के उमेश यादव, त्रिभुवन सिंह, भोला, बनारसी सहित रामपुर बस्ती के शीतल सिंह, जुगनू, संतोष, महेंद्र और रामचंदीपुर के नथुनी यादव, रमन्तू यादव, दीपक, लालजी, चन्द्रशेखर, महेश जैसे किसानों की उपजाऊ भूमि गंगा में समाहित हो चुकी है।



