प्रयागराज में फिर बनेगा इतिहास, माघ मेला 2026 में महाकुंभ जैसी हो रही तैयारियां, आएंगे 15 करोड़ लोग
संगम की रेत एक बार फिर आस्था की गूंज से भरने को तैयार है। प्रयागराज में हर साल लगने वाला माघ मेला अगले महीने शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार इसका स्वरूप पहले से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा भव्य होगा। महाकुंभ के बाद भी संगम तट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है और अब माघ मेले में करोड़ों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। इसी वजह से प्रशासन इस आयोजन को साधारण नहीं, बल्कि महाकुंभ 2025 जैसी दिव्यता देने की तैयारी में जुट गया है।
प्रयागराज का माघ मेला सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। माघ महीने में संगम के किनारे श्रद्धा, संयम और नियम के साथ जीवन जीने की परंपरा हर साल जीवंत हो उठती है। लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं और कल्पवास के लिए पूरा महीना यहीं बिताते हैं। इसके लिए प्रशासन हर साल संगम के रेतीले मैदान में एक अस्थायी शहर बसाता है, जहां रहने, खाने, इलाज, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मेला पूरी तरह कुंभ मॉडल पर तैयार किया जा रहा है
इस बार माघ मेले की तैयारियां इसलिए भी खास हैं, क्योंकि प्रशासन को 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए मेला पूरी तरह कुंभ मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। सड़कें हों या घाट, बिजली-पानी हो या शौचालय, हर व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत और सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से राज्य को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है। इसका असर प्रयागराज में साफ दिखाई देता है। प्रयागराज महाकुंभ को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिलने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यही वजह है कि 3 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले माघ मेले को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है।
राज्य का बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी
महाकुंभ 2025 की ऐतिहासिक सफलता के बाद प्रशासन प्रयागराज को एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, देश-विदेश से आए लोगों के अनुभवों ने शहर की पहचान को और मजबूत किया है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2022 में जहां करीब ढाई करोड़ पर्यटक प्रयागराज आए थे, वहीं इस साल जनवरी से सितंबर के बीच यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।
इसी वजह से इस बार माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कहा है कि माघ मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक आ सकते हैं। इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए मेले को वैश्विक पहचान देने की तैयारी की जा रही है। ब्रांडिंग, प्रचार और व्यवस्थाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि संगम आने वाला हर व्यक्ति बेहतर और यादगार अनुभव लेकर लौटे।
माघ मेले के इतिहास में पहली बार सीएम ने लोगो जारी किया
प्रयागराज के जिलाधिकारी ने बताया कि माघ मेले के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से माघ मेले का विशेष लोगो जारी किया गया है। यह लोगो मेले के दर्शन-तत्व को उजागर करता है और तीर्थराज प्रयाग, संगम की तपोभूमि तथा माघ मास में संगम की रेती पर अनुष्ठानों की महत्ता को समग्र रूप में दर्शाता है। लोगो में सूर्य और चंद्रमा की 14 कलाओं को दिखाया गया है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की स्थितियों को प्रतिबिंबित करती हैं। माघ मेला इसी नक्षत्रीय गणना पर आधारित होता है, जब सूर्य मकर राशि में होता है और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा माघी या अश्लेषा–पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों के समीप होता है। लोगो में चंद्रमा की 14 कलाएं मानव जीवन, मानसिक ऊर्जा और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी हुई मानी जाती हैं। साथ ही, प्रयागराज का अविनाशी अक्षयवट और कल्पवासियों के लिए इसका विशेष महत्व भी दर्शाया गया है।
लोगो में महात्मा का चित्र इस देवभूमि की सनातनी परंपरा को प्रदर्शित करता है, जहां ऋषि-मुनि सदियों से आध्यात्मिक साधना करते आए हैं। माघ मास में पूजन और कल्पवास का पूर्ण फल संगम स्नान के बाद श्री लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन से प्राप्त होता है, जिसे लोगो में मंदिर और पताका के रूप में दर्शाया गया है। संगम पर साइबेरियन पक्षियों की उपस्थिति भी यहां के प्राकृतिक और पर्यावरणीय महत्व को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा पूजन कर किया आरंभ
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा पूजन किया था। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि माघ मेला महाकुंभ की तरह दिव्य और भव्य उत्सव होना चाहिए। इसी के तहत अफसरों की वही टीम तैनात की गई है, जिसने महाकुंभ की जिम्मेदारी संभाली थी। इस बार करीब 21 लाख कल्पवासी पूरे एक महीने तक संगम तट पर कल्पवास करेंगे।
प्रशासन माघ मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विकसित कर रहा है। रेतीले मैदान में कुंभ मॉडल पर सड़कें, घाट, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही हैं। कल्पवासियों के लिए रहने की व्यवस्था को इस बार ज्यादा सुव्यवस्थित और आरामदायक बनाया जा रहा है।
माघ मेला 2026 की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन 3 जनवरी 2026 से होगी। इसके बाद मकर संक्रांति 15 जनवरी, मौनी अमावस्या 18 जनवरी, वसंत पंचमी 23 जनवरी, माघी पूर्णिमा 1 फरवरी और महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को प्रमुख स्नान पर्व पड़ेंगे। इनमें मौनी अमावस्या के दिन सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने स्नान पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाने की योजना बनाई है।
रेलवे और स्थानीय प्रशासन मिलकर यात्रियों की सुविधा पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। प्रयागराज जंक्शन, प्रयाग, रामबाग और झूंसी स्टेशन पर अतिरिक्त संकेतक और यात्री सहायता केंद्र बनाए जा रहे हैं, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को स्टेशन से मेला क्षेत्र तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो।
इस बार माघ मेले पर करीब 129 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेले की सफाई व्यवस्था के लिए 3300 सफाई कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। मेला क्षेत्र में 126 किलोमीटर लंबा रास्ता चकर्ड प्लेट से बनाया जाएगा। संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल बनाए जाएंगे। करीब 15 हजार बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए 3800 बसों का संचालन होगा, जिनमें 75 ई-बसें भी शामिल होंगी। सुरक्षा के लिए 17 थाने और 42 पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी।



