भारत के लिए बड़ा झटका, फेल हो गया PSLV-C62 मिशन, जानें ISRO चीफ ने क्या कहा
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO ) ने PSLV C62 मिशन लॉन्च करके इतिहास रचने की कोशिश की, लेकिन यह मिशन फेल हो गया। इसरो का यह 2026 में पहला मिशन था। इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि आज हमने PSLV C62/EOS-N1 मिशन लॉन्च करने की कोशिश की। PSLV व्हीकल चार स्टेज वाला व्हीकल है, जिसमें दो सॉलिड स्टेज और दो लिक्विड स्टेज हैं। तीसरे स्टेज के आखिर के पास व्हीकल का परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक था। तीसरे स्टेज के आखिर में हमें व्हीकल में ज्यादा डिस्टर्बेंस दिख रहा है। इसके बाद, व्हीकल के फ्लाइट पाथ में एक डेविएशन देखा गया है। हम डेटा का एनालिसिस कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि PSLV-C62 मिशन फेल हो चुका है। इसमें रॉकेट तो सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ था, लेकिन तीसरे स्टेज के बाद दिक्कतें शुरू हो गईं। पहले आंकड़ा देरी से मिलने लगा और फिर चौथा स्टेज शुरू होते ही अपडेट्स आने ही बंद हो गए। हालांकि, इसरो चीफ ने कहा है कि फिलहाल उनकी टीम टाडा का एनालिसिस कर रही है, जिसके बाद किसी अंतिम फैसले पर पहुंचा जाएगा।
भारत के लिए क्यों जरूरी था ये मिशन
- इसे DRDO के लिए डेवलप किया।
- यह राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी के लिए बहुत था।
- इसका इस्तेमाल खेती, शहरी मैपिंग और पर्यावरण ऑब्जर्वेशन जैसे क्षेत्रों में भी किया जाना था।
PSLV-DL वेरिएंट का था पांचवा मिशन
44.4 मीटर लंबा पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C62) न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए एक कमर्शियल मिशन के तहत सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से रवाना हुआ था। इसरो ने कहा कि यह लॉन्च PSLV की 64वीं उड़ान और PSLV-DL वेरिएंट का पांचवां मिशन था, जिसमें सभी 4 स्टेज ने सामान्य रूप से काम किया।
कई सैटेलाइट भी थे शामिल
इस मिशन में भारत और विदेशों से टेक्नोलॉजी प्रदर्शन उपग्रहों का एक विविध समूह शामिल था, जिसमें कक्षा में AI प्रोसेसिंग, स्टोर-एंड-फॉरवर्ड संचार प्रणाली IoT सेवाएं, विकिरण माप और कृषि डेटा संग्रह जैसे एप्लिकेशन शामिल थे।
पिछले साल भी फेल हुआ था मिशन
भारत के लिए यह लॉन्चिंग इसलिए भी अहम थी, क्योंकि इससे पहले 18 मई 2025 को लॉन्च किया गया PSLV-C61, तीसरे स्टेज में गड़बड़ी के कारण EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित नहीं कर सका था।



